गुरुवार, 15 फ़रवरी 2024

कृत्रिम बुद्धिमत्ताः यंत्रवत पत्रकारिता का दौर


इसी साल 18 मार्च की सुबह दिल्ली के एक पांच सितारा होटल के सभागार में उपस्थित लोग पत्रकारिता और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के प्रयोग का गवाह बने। इंडिया टुडे कॉनक्लेव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने आजतक चैनल ने एआई संचालित एंकर ’सना’ से सभी को परिचित कराया। सना ने अपना परिचय देते हुए समाचार भी पढ़े। पत्रकारिता के क्षेत्र में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के प्रयोग आधारित देश की यह पहली घटना बनी। एआई एंकर ’सना’ अब इसी समाचार चैनल में पूर्णकालिक एंकर की तरह दिन भर में कई बार ताजा समाचार और हेडलाइन्स पढ़ती है। 

रोबोटिक ग्राफिक्स और टेक्स्ट टू स्पीच तकनीक आधारित समाचार पाठन का पहला प्रयोग चीन में हुआ था। वर्ष 2018 में, चीन की शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने कंप्यूटर ग्राफिक्स का उपयोग करके दुनिया का पहला एआई-संचालित पुरुष समाचार एंकर बनाया था। इसी साल मार्च के महीने में रूस के ‘स्वोय टीवी’ ने स्नेज़ाना तुमानोवा को अपना पहला आभासी मौसम प्रस्तुतकर्ता के रूप में पेश किया था।

इसी साल मार्च के महीने में ही दुनिया का पहला समाचार चैनल जिसकी सामग्री पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आधारित चैट जीपीटी द्वारा उत्पन्न की जाती है, को लॉन्च किया। चैट जीपीटी के सीईओ एलन लेवी ने इसे समाचारों की दुनिया में गेम चेंजर बताया। 

ऐसे ही प्रयोगों ने पत्रकारिता में मीडिया पेशेवरों के बीच आशंका और चिंता को बढ़ा दिया है। पहली जो आशंका है वह पत्रकारों की नौकरियों को लेकर है। दुसरी जो चिंता है उसमें कई मीडिया पेशेवरों को लगता है कि एल्गोरिदम और ऑटोमेशन पर बढ़ती निर्भरता पत्रकारिता की विश्वसनीयता को कम कर देगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रोबोट के प्रसार ने मीडिया में यांत्रिकता के प्रयोग को बढ़ा दिया है। इसके सही और गलत की बहस पुरे विश्व में हो रही है भारत में भी यह चर्चा तेजी से मीडिया संस्थानों में प्रवेश कर रही है। भारतीय टीवी मीडिया में बहस विश्लेषण की जो संस्कृति पनपी है उसमें कई मीडिया विश्लेषकों को मानना है कि रोबॉट समाचार बुलेटिन तो पढ़ सकते हैं, लेकिन वे प्रतिक्रिया और बहस करने में सक्षम नहीं हो सकते हैं। एक खतरा इस बात का भी है कि एआई के समाचार या आलेख में डेटा की विश्वासनीयता संदिग्ध और पक्षपाती हो। एल्गोरिदम मनुष्यों द्वारा डिज़ाइन किए गए हैं, और ये पूर्वाग्रह से भरे भी हो सकते हैं। काफी आशंका है कि यह डेटा विश्लेषण को बदल कर परिणामों को संदिग्ध कर दें। 

इंटरनेट और पत्रकारिता

अखबार के दफ्तर में कम्प्युटर के आने पर भी इसी तरह की आशंका थी कि न्युज रुम छोटे हो जायेंगे, पत्रकारों की नौकरियां चली जायेंगी। आज की वस्तुस्थिति यही है कि कम्प्युटर ने पत्रकारिता को समृद्ध ही किया है। तकनीक और इंटरनेट के प्रयोग से पत्रकारिता काफी उन्नत ही हुई है। इंटरनेट का भविष्य भांपते हुए सभी मीडिया संस्थानों ने अपना ध्यान डिजिटल संस्करण की ओर दिया है। डिजिटल के अलग से संपादक और पत्रकार नियुक्त किए जा रहे हैं। यह स्थिति अखबारों के साथ साथ खबरिया टेलिविजन चैनलों की भी है। सभी का ज्यादा ध्यान डिजिटल पर है। परम्परागत मीडिया माध्यमों के साथ ही डिजिटल पत्रकारिता का समानांतर विस्तार हो रहा है। विश्व भर के मीडिया संस्थानों के आज करोड़ों समाचार आलेख, रिपोर्ट और फीचर से इंटरनेट भरा पड़ा है। हर दिन के सर्च में ये डेटा हमारे सामने आते रहते हैं। आज पत्रकारों को भी किसी विषय में शोध डेटा की जरुरत होती है तो वे भी इन सामग्रीयों का अकसर इस्तेमाल करते हैं। एआई भी अपने सर्च में इन्हीं आलेखों या समाचारों के डेटा का इस्तेमाल करता है। एआई आलेख तैयार करने के दौरान अपने एल्गोरिदम में भी इस डेटा के तथ्यों और सामग्रीयों का उपयोग करता है। यह भी सचाई है कि आज भी ग्राउंड रिपोर्टिंग और खोजी पत्रकारिता का विकल्प इंटरनेट या एआई नहीं हो सकता है। इन ग्राउंड रिपोर्टों से ही इंटरनेट की पत्रकारिता समृद्ध होती है। 


एआई की पत्रकारिता

डिजिटल पत्रकारिता आज और नए दौर में है। एआई ने डिजिटल माध्यमों में खोज और निर्माण को लगातार बदल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पत्रकारिता को कई तरह से बदल रहा है। यह पत्रकारों के कार्य, डेटा का विश्लेषण करने, रुझानों की पहचान करने, समाचार और लेख लिखने जैसे कार्य करने में सक्षम है। साथ ही इन कार्यों में पत्रकारों की मदद भी कर रहा है। पत्रकारिता में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब एक वास्तविकता है। डिजिटल मीडिया के आगमन के कारण, हम अनजाने में हर जगह कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित सामग्री का उपभोग करने लगे हैं। यूट्यूब की अनुशंसित वीडियो, फेसबुक व इंस्टाग्राम के फ़ीड और नियमित वेबसाइटों के विज्ञापन ये सभी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रयोग के उदाहरण हैं। यहां तक की व्यक्तिगत रुचि के समाचारों का न्युज फ़ीड भी इसी तकनीक का हिस्सा है।

एआई बॉट मानव अवलोकन और अनुभव को दोहराने में सक्षम है। एआई के सबसे बड़े फायदों में से एक पैटर्न को पहचानने की क्षमता है। ऐसी प्रणालियों को वास्तविक रिपोर्ट और नकली रिपोर्ट के बीच अंतर को पहचानने के लिए किया जा सकता है। एआई की खासियत है कि वह पत्रकारों द्वारा प्रशिक्षित हो सकता है। सीख कर तथ्यात्मक जानकारी को एक साथ कैसे जोड़ सकता है। प्रेस विज्ञप्ति को स्वचालित रूप से पढ़ने योग्य लेख लिखने के लिए अनुमति देता है जो केवल तथ्यों की रिपोर्ट करता है। इस तरह की प्रणालियों को राय के टुकड़ों को अनदेखा करने के लिए भी प्रशिक्षित किया जा सकता है जो वर्णनात्मक भाषा का भारी उपयोग करते हैं, साथ ही साथ पत्रकारों को ईमानदारी और राय मुक्त टुकड़े लिखने की क्षमता के आधार पर रैंकिंग भी करते हैं। हमें एआई की इस चुनौती का सामना अनुकूलन के स्तर पर करना चाहिए। 

वाशिंगटन पोस्ट, बीबीसी और ब्लूमबर्ग जैसे प्रमुख मीडिया संगठन भाषा सॉफ्टवेयर की मदद से समाचार लेख प्रकाशित करने के लिए एआई का उपयोग कर रहे हैं। भारत में भी टाइम्स ऑफ इंडिया और दूसरे अखबार समुह अपने डिजिटल सामग्री को एआई के जरिये टेक्स्ट टू स्पीच का उपयोग कर रहे हैं। आज कई मीडिया संस्थान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर स्वचालित लेखन और अनुवाद में कर रहे है। दिन विशेष में कैलेंडर राइटिंग के लिए विशेषज्ञ पत्रकारों पर निर्भर रहना पड़ता था। अब ऐसे लेख एआई के टूल आसानी से तैयार कर रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने पिछले कुछ वर्षों में पत्रकारिता की बहुत मदद की है। कई कंपनियों के पास इन-हाउस सॉफ्टवेयर हैं जो सेकंड या मिनटों में समाचार लेख तैयार कर सकते हैं। अभी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जरूरत डेटा है। अब, यह डेटा अंक, टेक्स्ट, ऑडियो या वीडियो के रूप में हो सकता है। सॉफ्टवेयर उन पर समाचार योग्य लेख उत्पन्न करने में सक्षम होगा।

बहरहाल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक बेहतरीन टूल है जिसके पत्रकारिता के क्षेत्र में कई फायदे हैं। यह अभी भी एक उभरती हुई तकनीक है, लेकिन कई समाचार संगठन पहले से ही एआई का उपयोग कर रहे हैं। साथ ही, हमें यह याद रखना चाहिए कि एआई एक ऐसी तकनीक है जो अभी तक पूरी तरह से विकसित नहीं हुई है। इन तमाम चिंताओं और आंशकाओं से परे एआई और पत्रकारिता को आपस में काफी उन्नत होना है। इस आधार पर कृत्रिम बुद्धिमता का बेहतर प्रयोग पूरी तरह मानवी विवेक (आइक्यू) पर ही निर्भर है। हम एआई का बेहतर इस्तेमाल करते हुए पत्रकारिता को औ बेहतर कर सकते हैं।