भारत में रेडियो क्लबों से शुरू प्रसारण आज सोशल मीडिया से होते हुए मोबाइल
एप्प के जरिये हथेली में आ सिमटा है। नौ दशकों से भी लंबे समय में प्रसारण
तकनीक के साथ और व्यापक हुआ है। आज भारत विश्व के सबसे बड़े प्रसारण उपभोक्ता वाला
देश है। देश में प्रसारण की स्वायत संस्था ‘प्रसार
भारती’आज विश्व की सबसे बड़ी
लोक प्रसारक संस्था है। प्रसारण का इतिहास रेडियो के प्रसारण के साथ ही माना जाता
है। भारत में प्रसारण के महत्व से लोगों को अवगत कराने के लिए हर साल 23 जुलाई को ‘राष्ट्रीय प्रसारण दिवस’ मनाया जाता है।
भारत में प्रसारण
का आरंभ कलकत्ता, बम्बई, मद्रास और लाहौर में कुछ शौकिया लोगों
के रेडियो क्लब के साथ हुआ था। रेडियो क्लब ऑफ कैलकटा वह पहला रेडियो क्लब था
जिसने नवम्बर 1923 में कार्य करना आरंभ किया। इसके बाद मद्रास प्रेसिडेंसी रेडियो
क्लब ने मई 1924 को प्रसारण किया। उन दिनों प्रसारण से जुड़ी कई दिक्कतों के कारण
सभी रेडियो क्लब आपस में सम्मिलित हो गए। इस विलय के बाद 1927 में एक निजी प्रसारण
संस्था इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी लिमिटेड की स्थापना हुई। इस कम्पनी का पहला केन्द्र 23 जुलाई 1927 को बम्बई में खोला गया। इसके साथ ही भारत में प्रसारण का विधिवत
आरंभ माना जाता है। इसलिए हर साल 23 जुलाई को ‘राष्ट्रीय प्रसारण दिवस’ मनाया जाता है।
सन1930 में
तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी का अधिग्रहण कर ‘इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग
सर्विस’ की स्थापना
की। जिसका नाम 1936 में बदल कर ‘ऑल इंडिया रेडियो’ किया
गया। आजादी के समय ऑल इंडिया रेडियो के पास छह रेडियो प्रसारण केंद्र और
ट्रान्समीटरों की संख्या 18 थी। जिनमें छह मीडियम वेब और 12 शॉर्ट वेब के
ट्रांसमीटर थे। भारत सरकार संचार में रेडियो के महत्व को समझते हुए दो वर्षों में
ही 25 नए प्रसारण केन्द्रों स्थापना की।
1957 में ऑल इंडिया
रेडियो के अंदर दो महत्वपूर्ण बदलाव हुए जिसने रेडियो की लोकप्रियता में काफी
इजाफा किया। इसी वर्ष ऑल इंडिया रेडियो को ‘आकाशवाण’ नाम दिया गया, और व्यावसायिक चैनल ‘विविध भारती’ का आरंभ किया गया। विविध भारती अपने हल्के फुल्के मनोरंजक कार्यक्रमों से
बहुत कम समय में बेहद लोकप्रिय भी हो गया। आकाशवाणी और विविध भारती ये दोनों नाम
लोगों की जुबान पर चढ़ गए। ‘आकाशवाणी’ तो रेडियो का पर्याय ही बन गया था।
60 का दशक भारत में
प्रसारण के लिए कई बड़े बदलावों का दशक रहा। युनेस्को के सहयोग से भारत में
टेलीविज़न प्रसारण कि शुरुआती परीक्षण चलाये गए। दो सालों के परीक्षण कार्यक्रम के
परिणाम स्वरूप 1965 में स्वतंत्रता दिवस से देश में विधिवत टेलीविज़न प्रसारण का
आरंभ हुआ। अपने आरंभिक दिनों से 1976 तक टेलीविज़न प्रसारण आकाशवाणी के साथ ही जुड़ा
था। इसी साल सूचना प्रसारण मंत्रालय ने ‘दूरदर्शन’ नाम से टेलीविज़न प्रसारण को
आकाशवाणी से अलग और स्वतंत्र पहचान दी।
इस समय टेलीविजन के
आगमन ने रेडियो के लिए एक नयी चुनौती खड़ी कर दी थी। इस चुनौती में ही आकाशवाणी ने
रेडियो प्रसारण के लिए नए मौके तलाशे। दूरदर्शन के अलग होने के एक साल बाद ही
आकाशवाणी ने एफएम चैनलों की ओर कदम बढ़ाया। हालांकि एफएम रेडियो का पहला प्रसारण
मद्रास से 1977 में हुआ। इसकी लोकप्रियता का असल वक्त 1993 में आरंभ हुआ, जब निजी कंपनियों को एफएम टाइम
स्लाट उपलब्ध कराये जाने लगे और यह युवा जीवन शैली और लोकप्रिय संगीत का पर्याय बन
गया। 1999 में व्यवसायिक एफएम चैनलों के लिए यह क्षेत्र खोल दिया गया। देखते देखते
मेट्रो महानगरों से होते हुए छोट-बड़े सभी शहरों
में एफएम स्टेशनों की बाढ़ सी आ गयी। आज एफएम के
तीसरे चरण के साथ ही देश के 111 शहरों में 385 एफएम स्टेशन कार्यरत हैं। एफएम
प्रसारण ने रेडियो को टेलीविज़न के बावजूद लोकप्रिय बनाए रखा है।
आकाशवाणी रेडियो प्रसारण को सूचना, शिक्षा और मनोरंजन
के मूल उद्देश्यों से जोड़ते हुए कई प्रयोग करते रही है। एक बड़ा प्रयोग अप्रैल 1994
को स्काई रेडियो चैनल के जरिये किया गया, इसमें एफएम
रिसीवर पर 20 रेडियो चैनल सेटेलाइट के जरिये उपलब्ध कराए गए। आज आकाशवाणी के देश
भर में 487 केन्द्र सक्रिय हैं। इनमें विविध भारती, स्थानीय
रेडियो स्टेशन, और क्षेत्रीय
केन्द्र शामिल हैं। आज आकाशवाणी की पहुँच 99.19 फीसदी जनता और 92 प्रतिशत भारतीय
क्षेत्र तक है। दुनिया के सबसे
बड़े रेडियो समाचार संगठनों में से एक आकाशवाणी हर दिन 300 न्यूज बुलेटिन
राष्ट्रीय, क्षेत्रीय
ओर विदेश सेवा के तहत प्रसारित करती है। इसके अलावा आकाशवाणी की घरेलू सेवा 653
ट्रांसमीटरों के जरिये देश के समस्त सांस्कृतिक और भाषायी क्षेत्रों के लिए उपलब्ध
है।
1992 के बाद
प्रसारण के क्षेत्र में स्थानीय समुदाय को जोड़ने की पहल की गई। इसके तहत स्थानीय
रेडियो स्टेशन और सामुदायिक रेडियो के प्रयोग शुरू किए गए। सामुदायिक रेडियो
स्थानीय लोगों की रुचि के आधार पर कार्यक्रम बनाते है और प्रसारित करते हैं। इन
कार्यक्रमों की छोटे छोटे श्रोता समूहों तक व्यापक पहुँच होती है। यही कारण रहा कि स्थानीय विकासात्मक गतिविधियों के लिये ये स्टेशन काफी
सफल साबित हुए। सामुदायिक रेडियो का बड़ा प्रयोग देश के विश्वविद्यालय कैम्पस में
होने लगा। देश के कई विश्वविद्यालयों में आज निजी सामुदायिक रेडियो शिक्षा
और सूचना का अलख जगा रहे हैं। आज देश भर में 313 से अधिक सामुदायिक रेडियो स्टेशन
सक्रिय हैं।
आज तकनीक ने बहुत
प्रगति कर ली है और दुनिया की सारी जानकारी हमारे एक क्लिक या टच पर उपलब्ध है। अब
इंटरनेट क्रांति के बाद मोबाइल फोन ही टीवी और रेडियो का विकल्प बन कर सामने है।
प्रसार भारती ने मोबाइल तकनीक की ओर भी अपने आप को तैयार किया है। इस के NewsonAIR मोबाइल ऐप के 10
लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं। इस ऐप पर ऑल इंडिया रेडियो के सभी रेडियो चैनल को
डिजिटल रूप में सुना जा सकता है। ऑल इंडिया रेडियो लाइव स्ट्रीम में दिसम्बर 2021
तक 18 मिलियन श्रोताओं ने न्यूजऑनएयर ऐप का उपयोग किया। इसके आंकड़ें साल दर साल
बढ़ते ही जा रहे हैं। इस एप्प पर ऑल इंडिया रेडियो की 240 रेडियो सेवाओं से अधिक की
लाइव स्ट्रीम होती है। ऑल इंडिया रेडियो स्ट्रीमों के न केवल भारत में बड़ी
संख्या में श्रोता हैं, बल्कि विश्व में 85 से अधिक
देशों में इसके श्रोता हैं । वर्ष 2020 में, दूरदर्शन
और आकाशवाणी के डिजिटल चैनलों ने 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की, एक अरब से अधिक डिजिटल दृश्य और 6 अरब से अधिक डिजिटल वॉच मिनट दर्ज किए
गए हैं। अब आकाशवाणी के यूट्यूब चैनलों पर विभिन्न भारतीय भाषाओं में हजारों घंटे
की शैक्षिक सामग्री और टेलीक्लासेस उपलब्ध हैं।
2014 से भारत में रेडियो के माध्यम से एक ऐसे कार्यक्रम का प्रसारण आरंभ हुआ, जिसने देखते ही देखते फिर से रेडियो को दिलों में जिंदा कर दिया। यह
कार्यक्रम है मन की बात। आज शहर ही नहीं, गांव-कस्बों
में भी मन की बात कार्यक्रम को काफी पसंद किया जाता है। रेडियो के महत्व पर बात
करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भी कहा था कि रेडियो जन-जन से जुड़ा हुआ माध्यम है।
संचार में रेडियो की बहुत बड़ी ताकत और उसकी गहराई है। रेडियो की बराबरी कोई नहीं
कर सकता।
शौकिया रेडियो
क्लबों से शुरू प्रसारण नौ दशकों में आज स्वतंत्र यूट्यूब चैनलों और सोशल मीडिया के लाइव स्ट्रीम
तक पहुँच चुका है। इन यूट्यूब चैनलों के जरिये
छोटे गांव, शहर और बड़े विमर्श की सामग्री डिजिटल उपलब्ध
है। आज देश के हर प्रमुख शहर में जुनूनी युवा यूट्यूब के जरिये प्रसारण में शामिल
हो रहे हैं। भारत के लोक सेवा प्रसारक प्रसार भारती ने
अपने स्थापना काल से ही स्वतंत्र रूप में प्रसारण के सहज, सुलभ और व्यापक विस्तार के लिए कई सारे उपाय किए। मोबाइल के दौर के साथ ही
प्रसार भारती ने डिजिटल प्लेटफॉर्मों में अपनी
उपस्थिती दर्ज की। कार्यक्रमों की लाइव स्ट्रीमिंग, सूचनापरक
नए वेबसाइट, यूटयूब चैनल्स, पॉडकास्ट, मोबाइल एप्प और एलेक्सा पर कार्यक्रम की उपलबद्धता से प्रसार भारती ने
व्यापक उपस्थिती दर्ज की है। सोशल मीडिया व्हाट्सएप, फेसबुक
और ट्विटर में भी प्रसार भारती की बड़ी उपस्थिती है।