लोहरदगा झारखण्ड का सबसे छोटा जिला है । यहाँ पत्रकारिता स्वतंत्र है । और सुरक्षित हाथों में है लेकिन असुरक्षित हैं तो यंहा के पत्रकार । २२ फ़रवरी की रात १० बजे उपर्युक्त बातें सच भी हुयी । दिन भर के सारे समाचार भेजने के बाद अपने घर लौट रहे दैनिक जागरण के स्थनीय पत्रकार राकेश कुमार सिन्हा अपराधियों ने गोली चलायी ।
राकेश सिन्हा दैनिक जागरण के मोडेम इंचार्ज हैं । श्री सिन्हा को ३ गोली मारी गयी । इश्वर की कृपा और स्थनीय लोगों की मदद से प्राथमिक इलाज कर रिम्स के लिए रेफर कर दिया गया । बिच शहर में ऐसी अपराधिक घटनाएँ शहर की सुरक्षा तंत्र की खामियों को उजागर करतें हैं ।
इस पुरी घटना सबसे दुखद बात यह रहा की किसी भी अखबार ने नही लिखा की राकेश सिन्हा किस मीडिया हाउस के थे । ख़ुद दैनिक जागरण ने भी श्री सिन्हा को अपने अखबार नाम नही दिया । जबकी ख़ुद खबर बने सिन्हा के बगल में उनकी बाई लाइन स्टोरी छापी। आख़िर चार वर्षों से दैनिक जागरण की सेवा का यह फल ! जिसके लिए दिन रात अपना नैतिक अनैतिक सब लुटा कर सेवा करता है वह कंपनी के नाम से भी वंचित क्यों ? जब एक पत्रकार अपनी मीडिया हाउस के प्रति जवाबदेह होता है तो भीर मीडिया हाउस पत्रकार के प्रति जवाबदेह क्यों नही ?
यह सवाल सिर्फ़ राकेश सिन्हा जैसे एक पत्रकार / स्ट्रिंगर की नही है, यह प्रश्न आज के हजारों स्ट्रिंगर / पत्रकारों का है आखिर मीडिया हाउस यूज एंड थ्रो की पद्धति कब छोडेगी , कब मीडिया हाउस जवाबदेह होगा ? येही आज यक्ष प्रश्न है ।